Delivery boy
"इधर आओ, ज़रा पास आओ," कविता की आवाज़ में एक ऐसी खनक थी जो आम तौर पर उसके घर की शांति में नहीं सुनाई देती थी। उसके सामने उसका बेटा, आर्यन, खड़ा था, जो अभी-अभी समोसे की डिलीवरी देकर लौटा था। लेकिन कमरे का नज़ारा देखकर उसके हाथ से बैग छूट गया। कमरे में कविता की तीन सहेलियाँ—मीरा, ज़ोया और रिया—बिना एक भी कपड़े के, मखमली सोफे पर इस तरह फैली हुई थीं जैसे कोई जंगली बिल्ली शिकार का इंतज़ार कर रही हो। उनकी त्वचा पर हल्की पसीने की चमक थी, और उनकी आँखों में एक ऐसी भूख थी जो सिर्फ जिस्मानी थी। मीरा धीरे से उठी और आर्यन के पास आकर उसके पैंट के जिपर के पास अपनी नाक ले गई। उसने एक गहरी सांस ली, जैसे वह किसी महंगे परफ्यूम की खुशबू ले रही हो। "उफ़, इस पसीने और मेहनत की महक... कितनी मर्दाना है," उसने फुसफुसाते हुए कहा। उसने अपना चेहरा उसके उभार के पास सटाया और उसकी त्वचा की उस तीखी, नम गंध को महसूस किया। वह उस गंध को चूमने लगी, छोटे-छोटे किस्स उस जगह पर दिए जहाँ गर्मी सबसे ज़्यादा थी। आर्यन की सांसें तेज़ हो गईं, उसका शरीर कांपने लगा क्योंकि वह अपनी माँ के सामने इस अजनबी उत्तेजना ...