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"अगले हफ्ते तक अगर यह कमरा चमक नहीं गया, तो तेरी तनख्वाह से ज़्यादा तेरा हिसाब कटेगा," मालिक ने रिया की ठुड्डी को उंगली से ऊपर उठाते हुए कहा, लेकिन उसकी नज़रों में सफाई की कोई चाहत नहीं थी। रिया ने घबराकर अपनी नज़रें नीचे कीं, जहाँ मालिक का उभार उसके सामने किसी चुनौती की तरह खड़ा था, और जैसे ही उसने कुछ बोलने के लिए मुँह खोला, उसे एहसास हुआ कि आज की सज़ा शब्दों में नहीं, बल्कि जिस्मानी गुलामी में लिखी जानी है। मालिक ने बिना किसी चेतावनी के उसे नीचे झुकने पर मजबूर किया और रिया का मुँह उस सख्त अंग पर टिका दिया, जबकि दूसरे हाथ से उसने अपने दोस्तों को अंदर बुला लिया, जो दरवाजे पर खड़े होकर इस तमाशे को देखने के लिए बेताब थे।


रिया के कांपते हुए होंठ जैसे ही उस गर्माहट से छुए, उसके दिमाग में एक पल के लिए विरोध की लहर उठी, लेकिन मालिक की उंगलियों ने उसके बालों को मजबूती से जकड़ लिया, जिससे वह चाहकर भी पीछे नहीं हट सकी। दोस्तों का एक झुंड, जो अब तक दबे पाँव अंदर आया था, अब उसके चारों ओर एक घेरा बनाकर खड़ा हो गया; उनकी नज़रों में कामवाली की बेबसी और उसकी मजबूरी को देखने का एक अलग ही नशा था। "देख रहे हो लड़कों, इसे कहते हैं अनुशासन," मालिक ने एक कुटिल मुस्कान के साथ कहा और रिया के मुँह को और ज़ोर से अपने अंग पर दबा दिया। रिया की सिसकियाँ अब उस सख्त मांस के नीचे दब चुकी थीं, और जैसे ही उसने अपनी आँखें बंद कीं, उसे महसूस हुआ कि अब वह इस घर की नौकरानी नहीं, बल्कि उनके मनोरंजन का एक खिलौना बन चुकी है। एक-एक करके बाकी दोस्त भी करीब आने लगे, उनके चेहरों पर वासना साफ़ दिख रही थी और रिया को अब समझ आ गया था कि आज की यह 'सज़ा' सिर्फ शुरुआत थी।



"सब्र करो, पहले इसे स्वाद लेने दो," मालिक ने गुर्राते हुए कहा, लेकिन उसके शब्दों में कोई हमदर्दी नहीं थी। उसने रिया के सिर को पीछे की ओर झटका और उसे मजबूर किया कि वह अपनी जीभ से उस सख्त हिस्से को ऊपर से नीचे तक चाटती हुई महसूस करे। रिया की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन जैसे ही उसने अपनी सिसकियों को रोकने की कोशिश की, एक दोस्त ने पीछे से उसके कूल्हों को जोर से भींच लिया, जिससे उसके मुँह से एक हल्की कराह निकली और वह अनचाहे ही और गहराई से उस अंग को अपने मुँह में ले बैठी। अब कमरे में सिर्फ रिया की भारी साँसें और उन मर्दों के हवस भरे ठहाकों की आवाज़ गूँज रही थी। एक-एक करके, उन दोस्तों ने अपनी पैंट की ज़िप नीचे करना शुरू कर दिया, और रिया ने महसूस किया कि अब उसकी दुनिया सिर्फ उन मांसल अंगों के बीच सिमट गई है, जहाँ उसे अपनी बेबसी की कीमत हर किसी की प्यास बुझाकर चुकानी थी।

"देख क्या रही है? अब एक-एक करके सबकी बारी आएगी," मालिक ने रिया के बालों को पीछे की ओर खींचते हुए आदेश दिया और उसे अपने अंग से अलग कर दिया। रिया का चेहरा अब लार और वीर्य के मिश्रण से चमक रहा था, लेकिन उसकी आँखों में अब डर की जगह एक अजीब सी शून्यता छा गई थी। पहले दोस्त ने आगे बढ़कर रिया की गर्दन को कसकर पकड़ा और अपना सख्त अंग उसके होंठों के बीच ठूँस दिया। रिया ने जैसे ही उस नए और अनजाने स्वाद को महसूस किया, उसने अनजाने में ही अपनी जीभ का इस्तेमाल किया, जिससे उस दोस्त के मुँह से एक गहरी आह निकली। "साला, लगता है इसे आदत हो रही है," उसने हँसते हुए कहा और रिया के सिर को अपनी लय में आगे-पीछे चलाने लगा। बाकी दोस्त अब अपनी बारी का इंतज़ार नहीं कर रहे थे; एक ने उसके स्तनों को कसकर दबाया तो दूसरे ने उसकी साड़ी के पल्लू को झटके से खींचकर उसे पूरी तरह बेनकाब कर दिया। अब रिया इस कमरे के बीचों-बीच एक ऐसी वस्तु बन चुकी थी, जिसका एकमात्र मकसद उन भूखे मर्दों की वासना को शांत करना था, और जैसे-जैसे एक के बाद एक अंग उसके मुँह और बदन से टकरा रहे थे, उसे एहसास हो रहा था कि आज उसकी आत्मा इस घर की फर्श की तरह ही मैली होने वाली है।


"अब असली मज़ा आएगा, इसे पलटकर लेटाओ," मालिक ने आदेश दिया और एक झटके के साथ रिया को फर्श पर पटक दिया। रिया की कमर ठंडी टाइल्स से टकराई, लेकिन उसकी चीख उन मर्दों के हवस भरे शोर में दब गई। जैसे ही वह संभलने की कोशिश कर रही थी, दो दोस्तों ने उसके पैरों को पकड़कर मजबूती से फैला दिया, जिससे उसका पूरा बदन अब उनकी नज़रों के सामने एक खुले निमंत्रण की तरह था। मालिक ने अपनी पैंट पूरी तरह उतार फेंकी और बिना किसी लुब्रिकेशन के, एक झटके में अपना सख्त अंग रिया के गीले होंठों से हटाकर सीधे उसके निचले हिस्से की गहराई में उतार दिया। रिया के मुँह से एक तीखी कराह निकली, लेकिन उस दर्द के बीच एक अजीब सी सिहरन भी थी, जिसने उसके दिमाग को सुन्न कर दिया था।






मालिक के शरीर का वह भारी दबाव रिया के भीतर इस कदर धँसा कि उसकी साँसें एक पल के लिए थम गईं। वह दर्द और दबाव इतना तीव्र था कि रिया की उंगलियाँ फर्श की टाइल्स को खुरचने लगीं, लेकिन उन मर्दों के लिए यह तड़प महज़ एक उत्तेजक शोर थी। मालिक ने बिना किसी नरमी के अपनी कमर को एक लय में आगे-पीछे झटकना शुरू किया, जिससे रिया का पूरा बदन बिस्तर की तरह हिलने लगा। उसके चेहरे पर दर्द और बेबसी के आंसू थे, लेकिन उसकी आँखों के सामने अब उन बाकी दोस्तों के चेहरे थे, जो अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए अपने अंगों को सहला रहे थे।



 

"अब इसका मुँह खाली क्यों है? इसे रुकने नहीं देना," मालिक ने गुर्राते हुए आदेश दिया, और जैसे ही उसने एक गहरी और ज़ोरदार झटकी मारी, उसने रिया के सिर को पीछे से झपटकर दोबारा अपने अंग की ओर मोड़ा। अब रिया की हालत किसी खिलौने जैसी हो गई थी—नीचे से मालिक का सख्त अंग उसकी गहराई को चीर रहा था, और ऊपर से उसके मुँह में एक दूसरे दोस्त ने अपना उत्तेजित मांस ठूँस दिया था। रिया की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा, उसका 
गला जैसे किसी भारी बोझ तले दब गया हो, जहाँ साँस लेने की जगह अब सिर्फ मांस के सख्त टुकड़ों ने ले ली थी। रिया का शरीर अब एक ऐसा पुल बन चुका था जिस पर वासना की अनगिनत लहरें टकरा रही थीं। जब मालिक ने अपनी गति और तीव्र कर दी, तो रिया की कमर ऊपर की ओर उठी, और उसी पल दूसरे दोस्त ने उसके मुँह में अपने अंग को और गहराई से 
धकेला, जिससे रिया की आँखों से पानी बह निकला और उसकी आवाज़ एक घुटती हुई सिसकी में बदल गई। उसके फेफड़े हवा के


के लिए तरस रहे थे, लेकिन उन भूखे मर्दों को उसकी तकलीफ से कोई लेना-देना नहीं था। जैसे ही मालिक का चरम करीब आया, उसने रिया की कमर को और मजबूती से जकड़ा और एक अंतिम, जोरदार झटके के साथ अपना सारा वीर्य उसकी गहराई में छोड़ दिया। रिया का शरीर एक बार फिर झटक कर काँपा, लेकिन इससे पहले कि वह होश संभाल पाती, उसके मुँह में मौजूद दोस्त ने भी अपनी हवस का सैलाब उसके गले के अंदर उतार दिया। लार और वीर्य के उस कड़वे स्वाद ने रिया के गले को पूरी तरह जाम कर दिया, और वह बस बेबसी से ऊपर छत को ताकने
रिया की पलकें भारी हो चुकी थीं और उसकी चेतना अब धुंधली पड़ रही थी, लेकिन कमरे में मौजूद वासना का शोर अभी थमा नहीं था। मालिक ने एक गहरी साँस लेते हुए अपना अंग बाहर खींचा, जिससे एक चिपचिपी आवाज़ गूँजी, और उसने बिना एक पल की देरी किए रिया के चेहरे पर हाथ मारकर उसे जगाने की कोशिश की। "अभी तो पार्टी शुरू हुई है, इसे सोने मत देना," उसने ठहाका मारते हुए कहा, और इशारा किया कि अब अगली बारी किसकी है। 
रिया ने queen महसूस किया और एक धीमी मुस्कान उसके होंठों पर तैर गईरिया सिर पर अपना हाथ जमाए रखा, मानो वह किसी पालतू जानवर को इनाम दे रही हो। कमरे की हवा अब भारी हो चुकी थी और उसमें डर, मजबूरी और एक अजीब सी कामुकता का मिश्रण घुल गया था। रिया की सांसों की गति तेज़ हो गई, और उसकी आँखों में वह चमक एक गहरे सुकून में बदल रही थी