"तुम अपनी धुन में हो या मेरी?" रिया ने यह बात तब कही जब वह मेरे बिल्कुल करीब खड़ी थी, इतनी करीब कि उसकी सांसें मेरी गर्दन पर किसी गर्म लहर की तरह महसूस हो रही थीं। बारिश बाहर पागलपन पर थी, छत की टिन शेड पर गिरती बूंदों का शोर कमरे के सन्नाटे को और गहरा कर रहा था। मैंने जो धोती पहनी थी, वह अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी और शरीर से चिपक गई थी। बिना अंडरवियर के, मेरा उभार साफ़ झलक रहा था, और हर बार जब रिया मेरी तरफ देखती, मेरा शरीर बिजली के झटके की तरह प्रतिक्रिया करता। वह मुझे देख रही थी—सिर्फ देख नहीं रही थी, वह मुझे पढ़ रही थी। उसकी आँखों में वह भूख थी जिसे छिपाया नहीं जा सकता। "तुमने देखा नहीं कि यह बाहर निकल रहा है?" रिया ने फुसफुसाते हुए कहा, उसका हाथ धीरे से मेरी जांघ के पास आया। उसने जान-बूझकर अपनी उंगलियों को धोती के उस ढीले हिस्से से छुआया जहाँ मेरा लंड धड़क रहा था। मेरी सांसें अटक गईं। "रिया... तुम..." "चुप रहो," उसने मेरी बात काटते हुए कहा। उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी, लेकिन उसकी आँखों में एक गहरा जुनून था। उसने अपना शरीर मेरी ओर झुकाया...