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"तुम मेरी मर्जी से नहीं चलोगे, तो मैं पुलिस को फोन करके तुम पर रेप का इल्ज़ाम लगा दूंगी," रिया ने अपनी आवाज़ में एक अजीब सी ठंडक लाते हुए कहा, जबकि उसकी नज़रें अभी भी राजू के उस हिस्से पर टिकी थीं जिसे उसने अभी-अभी अपनी उंगलियों से छुआ था। राजू, जो अब तक इस खेल को सिर्फ एक हल्की-फुल्की छेड़खानी समझ रहा था, अचानक ठिठक गया; उसने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन रिया का चेहरा अब मोहक नहीं, बल्कि एक शिकारी जैसा हो गया था। उसे अहसास हुआ कि यह कोई आपसी सहमति वाला खेल नहीं था, बल्कि एक ऐसा जाल था जिसमें उसकी मजबूरी को उसकी कमजोरी बना दिया गया था।
राजू की सांसें अचानक तेज़ हो गईं और उसके दिमाग में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। उसने अपनी नज़रें झुकाकर कमरे के कोने में रखे उस पुराने सोफे को देखा, जहाँ वह अक्सर रिया के आदेशों का इंतज़ार करता था। वह जानता था कि रिया इस घर की मालकिन की सबसे भरोसेमंद इंसान है, और अगर उसने एक बार पुलिस को फोन कर दिया, तो इस शहर में कोई उसकी बात नहीं सुनेगा; लोग सिर्फ उसकी साख और रसूख को देखेंगे। डर ने उसके शरीर में एक सिहरन पैदा कर दी, लेकिन वह डर कामुकता के साथ घुल-मिल गया था। उसने धीरे-धीरे अपनी नज़रें ऊपर उठाईं और रिया की आँखों में देखा, जहाँ अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, बल्कि एक क्रूर जीत का अहसास था। मजबूरी की उस बेड़ियों ने उसे अब घुटनों के बल झुकने पर मजबूर कर दिया था, क्योंकि उसे पता था कि यहाँ से भागने का कोई रास्ता नहीं है—सिवाय उस रास्ते के, जिस पर रिया उसे ले जाना चाहती थी।
रिया ने उसकी घबराहट को महसूस किया और एक धीमी, विजयी मुस्कान उसके होंठों पर तैर गई। उसने राजू के जबड़े को धीरे से पकड़कर अपना चेहरा उसके करीब लाया, उसकी सांसें अब राजू की त्वचा को छू रही थीं। "अब बताओ राजू, अब भी मना करोगे या फिर चुपचाप मेरी बात मानोगे?" उसने फुसफुसाते हुए पूछा, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में मिन्नत नहीं, बल्कि एक आदेश था। राजू का दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि उसे अपने कानों में उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी। उसने एक बार फिर कमरे के दरवाज़े की ओर देखा, जो बंद था, और फिर रिया की उन आँखों में देखा जिनमें अब सिर्फ सत्ता का नशा था।
हार मान चुके राजू ने एक गहरी, कांपती हुई सांस ली। उसे पता था कि यहाँ सच और झूठ के बीच की लकीर रिया के हाथ में है। उसने धीरे-धीरे अपना हाथ उठाया और अपनी आंखों के सामने छाई उस बेबसी को स्वीकार करते हुए, रिया के इशारे पर झुकने लगा। रिया ने उसकी इस हार को भांप लिया और उसकी पकड़ राजू के जबड़े पर और मज़बूत हो गई, जैसे वह उसे यह एहसास दिलाना चाहती हो कि अब उसकी अपनी कोई मर्जी नहीं बची है।
रिया ने एक हल्की सी हंसी हंसी, जो कमरे की खामोशी में किसी नुकीले खंजर की तरह गूंजी। उसने बिना किसी हिचकिचाहट के राजू को नीचे झुकने का इशारा किया और अपनी आंखों में एक अजीब सी चमक लाते हुए उसे अपनी ओर खींचा। राजू का शरीर कांप रहा था, लेकिन अब यह डर से ज्यादा उस तनाव का परिणाम था जो उसके और रिया के बीच एक अदृश्य दीवार की तरह खड़ा था। जब उसने देखा कि रिया के चेहरे पर अब एक तरह का जुनून सवार था, तो उसे समझ आ गया कि वह सिर्फ एक नौकर नहीं, बल्कि रिया की सत्ता का एक खिलौना बन चुका है। उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और उस कड़वे सच को गले लगा लिया कि उसकी मर्जी अब केवल एक शब्द थी, जिसका कोई अर्थ नहीं रह गया था। जैसे ही उसने आगे बढ़कर उसकी इच्छा का पालन करना शुरू किया, रिया ने उसके बालों में अपनी उंगलियां फंसा दीं और एक गहरी आह भरते हुए फुसफुसाया, "यही वह तरीका है राजू, जिससे तुम इस घर में अपनी जगह बचाए रखोगे।"
राजू के होंठों ने जैसे ही उस गर्माहट को छुआ, उसे महसूस हुआ कि रिया का शरीर हल्का सा थरथराया है, लेकिन यह थरथराहट कमजोरी की नहीं, बल्कि नियंत्रण के चरम सुख की थी। वह अब सिर्फ एक इंसान नहीं, बल्कि एक ऐसी मशीन बन चुका था जिसका रिमोट रिया के हाथ में था। जैसे-जैसे वह उसकी इच्छाओं को पूरा करने लगा, रिया ने उसके सिर पर अपना हाथ जमाए रखा, मानो वह किसी पालतू जानवर को इनाम दे रही हो। कमरे की हवा अब भारी हो चुकी थी और उसमें डर, मजबूरी और एक अजीब सी कामुकता का मिश्रण घुल गया था। रिया की सांसों की गति तेज़ हो गई, और उसकी आँखों में वह क्रूर चमक अब एक गहरे सुकून में बदल रही थी, क्योंकि उसने न केवल राजू के शरीर को, बल्कि उसकी आत्मा के उस हिस्से को भी जीत लिया था जहाँ स्वाभिमान रहता है। उसे पता था कि अब राजू कभी पलटकर सवाल नहीं करेगा, क्योंकि इस खेल में हारने वाला सिर्फ राजू था, और जीतने वाली रिया, जिसने एक झूठ की बुनियाद पर अपनी सल्तनत खड़ी कर ली थी।
तभी अचानक बाहर गैलरी में किसी के चलने की आवाज़ गूंजी और एक भारी दरवाज़ा खुलने की चरचराहट सुनाई दी। राजू का शरीर एक झटके के साथ पीछे की ओर खिंचा, उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़कने लगा कि उसे लगा शायद वह उसकी छाती से बाहर आ जाएगा। डर के मारे उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं—क्या मालकिन वापस आ गई थीं? रिया के चेहरे पर एक पल के लिए घबराहट की लकीर उभरी, लेकिन वह उतनी ही तेज़ी से गायब हो गई और उसकी जगह एक शातिर आत्मविश्वास ने ले ली। उसने बड़ी सहजता से राजू को धक्का दिया और अपने कपड़ों को ठीक करते हुए ऐसे खड़ी हो गई जैसे पिछले कुछ मिनटों में कुछ हुआ ही न हो। उसने राजू की ओर एक तिरछी, चेतावनी भरी नज़र डाली, जिसमें साफ़ संदेश था कि अगर उसने एक शब्द भी बोला, तो वह इल्ज़ाम वाला दांव चलाने में एक सेकंड की भी देरी नहीं करेगी। राजू अब वहीं फर्श पर बैठा हुआ अपनी सांसों को काबू करने की कोशिश कर रहा था, जबकि रिया ने अपनी आवाज़ को एकदम सामान्य करते हुए पुकारा, "जी मालकिन, मैं बस राजू को डाँट रही थी कि उसने कमरे की सफाई ठीक से नहीं की।" इस एक वाक्य ने राजू को दोबारा याद दिला दिया कि वह इस घर में सिर्फ एक अदृश्य साया है, और रिया वह आइना है जो उसे वही दिखाता है जो वह चाहती है।
मालकिन की नज़रें कमरे के बिखरे हुए माहौल और राजू के चेहरे पर छाई उस अजीब सी हड़बराहट पर ठहरीं। उन्होंने एक बार रिया को देखा और फिर राजू की ओर, जिसकी सांसें अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई थीं। कमरे में एक भारी खामोशी छा गई, जहाँ सिर्फ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी। मालकिन ने अपने चेहरे पर एक हल्की सी शिकन लाते हुए कहा, "इतनी डाँट कि बेचारा राजू का चेहरा सफेद पड़ गया है, रिया? खैर, सफाई तो होनी ही चाहिए, लेकिन इतनी सख्ती भी ठीक नहीं।" रिया ने बड़ी चालाकी से अपना चेहरा झुकाया और एक मासूम मुस्कान के साथ जवाब दिया, "जी मालकिन, बस मुझे लगा कि यह थोड़ा आलस कर रहा है, इसलिए मैंने इसे थोड़ा सबक सिखाया।" मालकिन बिना किसी शक के मुड़ीं और अपने कमरे की ओर बढ़ गईं, लेकिन उनके जाते ही रिया का वह मासूम चेहरा एक पल में गायब हो गया। उसने राजू की ओर देखा, जो अब तक राहत की सांस ले रहा था, और अपनी उंगलियों से उसके गाल को ज़ोर से दबाया, जिससे राजू के चेहरे पर एक दर्द भरी शिकन आई। "किस्मत अच्छी थी तुम्हारी कि वह अभी चली गईं, लेकिन याद रखना राजू, यह सिर्फ एक ट्रेलर था," रिया ने उसकी आँखों में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा, "अब से तुम वही करोगे जो मैं कहूँगी, वरना अगली बार मैं मालकिन को सफाई के बारे में नहीं, बल्कि तुम्हारी 'हरकतों' के बारे में बताऊँगी।" राजू को महसूस हुआ कि वह अब सिर्फ उस घर का नौकर नहीं, बल्कि रिया की एक ऐसी ज़ंजीर बन गया है जिसका सिरा पूरी तरह उसके नियंत्रण में था।
