Guy a friends brother
नेहा और उसकी सहेली सोफे पर बैठकर मैगजीन पलट रही थीं, लेकिन उनकी बातों का रुख अचानक कामुकता की ओर मुड़ गया। नेहा ने अपनी सहेली की ओर देखते हुए शरारत से मुस्कुराया और धीरे से फुसफुसाया, "यार, तूने देखा? उसका साइज तो एकदम गजब है," और फिर दोनों खिलखिलाकर हंसने लगीं और उस 'लंड' की बनावट और मजबूती पर चर्चा करने लगीं। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि पास ही खड़ा राजू, जो उनके पैर दबाने के बहाने नीचे बैठा था, उनकी हर एक बात को इतनी बारीकी से सुन रहा था कि उसके शरीर में एक अजीब सी हलचल होने लगी। उनकी बातें राजू के लिए किसी उत्तेजक ईंधन की तरह काम कर रही थीं, और देखते ही देखते उसकी पैंट के अंदर उसकी मर्दानगी पूरी तरह से सख्त होकर उभर आई। जब नेहा ने झुककर अपनी सहेली को कुछ और बताने की कोशिश की, तो उसकी नज़र सीधे राजू की उस उभरी हुई जगह पर पड़ी। एक पल के लिए सन्नाटा छा गया, लेकिन यह सन्नाटा शर्म का नहीं, बल्कि एक अनकही प्यास का था। नेहा ने अपनी सहेली की आँखों में देखा और बिना एक शब्द बोले, दोनों धीरे से झुककर उस सख्त उभार की ओर बढ़ीं और बिना किसी हिचकिचाहट के उसे अपने होठों का स्पर्श देने लगीं।राजू की सांसें अब उखड़ने लगी थीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह डर महसूस करे या इस अचानक मिले सुख का आनंद ले, लेकिन जब नेहा के गर्म होंठों ने उसके सख्त अंग को छुआ, तो उसके पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। उसकी सहेली ने भी अब कोई देरी नहीं की और उसने राजू के पैंट का बटन खोलकर उसे बाहर निकाला। ताजी हवा लगते ही राजू का लंड और भी ज्यादा तन गया, जो अब उनकी आँखों के ठीक सामने था। दोनों सहेलियों ने एक-दूसरे की ओर देखा और फिर एक होड़ सी मच गई; वे बारी-बारी से उसे अपने मुँह में लेने लगीं। राजू के मुँह से एक धीमी आह निकली, "अह्ह... साहिबा," लेकिन उन दोनों को अब उसकी आवाज़ से ज्यादा उसकी उस सख्ती का जुनून सवार था। वे उसे गहराई तक अपने मुँह में उतारने लगीं, जिससे राजू की कमर अपने आप ऊपर की ओर उठने लगी और वह उस सुखद अहसास में पूरी तरह डूब गया।
जैसे ही राजू का शरीर चरम सीमा पर पहुँचा, उसकी पूरी देह एक झटके के साथ तन गई। नेहा और उसकी सहेली ने उसकी इस हालत को भांप लिया और उन्होंने अपनी रफ्तार और दबाव को और बढ़ा दिया। राजू की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और उसके मुँह से एक दबी हुई चीख निकली, "ओह्ह... अब... अब!" और अगले ही पल, एक जोरदार झटके के साथ उसका गर्म गाढ़ा स्खलन उन दोनों के मुँह में फैल गया। उस तीव्र अहसास ने राजू को पूरी तरह से पस्त कर दिया और वह बेदम होकर सोफे और फर्श के बीच कहीं ठहर गया। नेहा ने धीरे से अपना सिर ऊपर उठाया और अपनी सहेली की ओर देखकर एक शरारती मुस्कान दी, जबकि उनके होंठों पर अब भी उस गाढ़ेपन का स्वाद बाकी था। राजू अभी भी अपनी सांसें वापस पाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी आँखों में अब डर नहीं, बल्कि एक गहरा संतोष था, क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि उसकी यह 'खामोशी' उन दोनों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन गई थी।

नेहा ने राजू की आंखों में देखा, जहां अब एक अजीब सा डर और बेतहाशा उत्तेजना का मिश्रण था। उसने धीरे से राजू के सीने पर अपना हाथ रखा, उसकी धड़कनें अब भी किसी नगाड़े की तरह बज रही थीं। सहेली ने राजू के पैरों के बीच अपनी जगह बनाई और धीरे से अपनी जांघों से उसके अब तक थोड़े नरम पड़ चुके अंग को सहलाया। यह स्पर्श इतना कोमल था कि राजू के शरीर में एक बार फिर बिजली सी दौड़ गई और उसका लंड, जो अभी-अभी शांत हुआ था, दोबारा अपनी पूरी ताकत के साथ तनकर खड़ा हो गया। नेहा ने अपनी सहेली की ओर देखा और एक गहरी सांस ली, फिर उसने धीरे से राजू के कानों के पास झुककर फुसफुसाया, "अभी तो हमने सिर्फ चखा है राजू, असली स्वाद तो तब आएगा जब हम इसे अपने अंदर महसूस करेंगे।" यह सुनते ही राजू के होश उड़ गए; उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह सपना नहीं बल्कि हकीकत है। इससे पहले कि वह कुछ बोल पाता, दोनों सहेलियों ने उसे सोफे पर पूरी तरह लिटा दिया और अपने कपड़ों की बाधाओं को एक-एक कर हटाने लगीं, जिससे कमरे का तापमान अचानक और भी ज्यादा गर्म हो गया।
जैसे ही कपड़ों का ढेर फर्श पर बिखर गया, राजू की आँखों के सामने दो गोरे और सुडौल बदन उभर आए, जिनकी चमक कमरे की हल्की रोशनी में और भी निखर रही थी। नेहा ने अपनी सहेली की कमर को पकड़ा और उसे राजू के ऊपर इस तरह टिकाया कि उसकी जांघें राजू के शरीर से पूरी तरह सट जाएं। राजू अब तक केवल एक मूक दर्शक था, लेकिन जब नेहा ने धीरे से अपने गीले और गर्म अंगों को राजू के सख्त लंड के चारों ओर लपेटा, तो उसके मुँह से एक भारी कराह निकली। वह अहसास इतना गहरा और असली था कि राजू के हाथों ने अनजाने में ही नेहा की कमर को कसकर जकड़ लिया। सहेली ने ऊपर से झुककर राजू के होंठों को अपने होंठों से मिलाया, जबकि नीचे नेहा धीरे-धीरे अपनी लय बनाने लगी। जैसे ही नेहा ने पहली बार उसे अपने अंदर गहराई तक महसूस किया, एक ऐसा बिजली का झटका लगा जिसने राजू और नेहा दोनों की सांसें एक पल के लिए रोक दीं। अब यह केवल एक खेल नहीं रह गया था; यह एक ऐसी भूख बन चुका था जहाँ हर एक धक्का और हर एक आह, कमरे की खामोशी को एक कामुक शोर में बदल रही थी।

जैसे ही नेहा की लय और तेज हुई, राजू का शरीर एक बेकाबू लहर की तरह ऊपर-नीचे होने लगा। वह अब तक केवल इस सुख को महसूस कर रहा था, लेकिन अब उसकी मर्दानगी नेहा के भीतर इतनी गहराई तक समा चुकी थी कि उसे अपने अस्तित्व का हर कतरा धड़कता हुआ महसूस हो रहा था। सहेली ने यह देखा कि नेहा और राजू दोनों ही इस मिलन के चरम पर पहुँच रहे हैं, तो उसने अपनी जगह बदली और राजू के ऊपर इस तरह झुक गई कि उसके स्तन राजू के सीने से पूरी तरह चिपक गए। उसने राजू के होंठों को अपने मुँह में भर लिया, जिससे राजू की दुनिया अब केवल उन दो गर्म बदनों के बीच सिमट कर रह गई थी। जैसे ही नेहा ने एक आखिरी, गहरा और जोरदार धक्का दिया, राजू का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और उसकी आँखों केसामने अंधेरा छा गया और उसके गले से एक ऐसी गूँज निकली जो दर्द और सुख का एक बेजोड़ संगम थी। एक जोरदार झटके के साथ, राजू का सारा संयम टूट गया और उसने खुद को पूरी तरह नेहा के भीतर खाली कर दिया। उस तीव्र स्खलन ने न केवल राजू को, बल्कि नेहा को भी एक गहरे सिहरन से भर दिया, जिससे उसकी जांघें राजू के शरीर के चारों ओर और भी कस गईं। सहेली, जो ऊपर से राजू को चूम रही थी, उसने भी इस चरम सुख की लहर को महसूस किया और उसने राजू के सीने पर अपनी पूरी देह का भार डाल दिया। कुछ पलों के लिए कमरे में सिर्फ उनकी भारी सांसों की आवाज गूँज रही थी, मानो समय ठहर गया हो। राजू का शरीर अब पूरी तरह ढीला पड़ चुका था और वह बेसुध होकर सोफे पर लेटा रहा, जबकि नेहा और उसकी सहेली ने एक-दूसरे की ओर देखा और उनके चेहरों पर एक ऐसी जीत की मुस्कान थी, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता था। उन्होंने महसूस किया कि जिसे वे केवल एक खेल समझ रही थीं, उसने उन्हें एक ऐसे जुनून से जोड़ दिया है, जो अब उन्हें बार-बार राजू की ओर खींचने वाला था।
अगले कुछ मिनटों तक कमरे में एक अजीब सी शांति छाई रही, जहाँ केवल कूलर की धीमी आवाज़ और उनकी उखड़ी हुई सांसें सुनाई दे रही थीं। नेहा ने धीरे से अपना सिर राजू के कंधे पर टिका दिया, जबकि उसकी सहेली ने अपने बिखरे हुए बालों को पीछे किया और एक गहरी, संतोषजनक सांस ली। लेकिन यह शांति ज्यादा देर नहीं टिकी; जैसे ही राजू के शरीर की उत्तेजना थोड़ी कम हुई, उसकी नज़रों में एक नया आत्मविश्वास जागा। अब वह केवल एक नौकर या एक मूक दर्शक नहीं था, बल्कि उन दोनों की इच्छाओं का केंद्र बन चुका था। उसने धीरे से अपना हाथ नेहा की कमर पर फेरा और उसकी आँखों में देखते हुए एक धीमी, भारी आवाज़ में कहा, "क्या इतना काफी था, या अभी और भी कुछ बाकी है?" इस बात ने जैसे नेहा के भीतर एक नई चिंगारी जला दी। उसने एक शरारती मुस्कान के साथ अपनी सहेली की ओर देखा और फिर राजू के कानों के पास झुककर फुसफुसाया, "अभी तो सिर्फ पहली बारी थी राजू, असली खेल तो अब शुरू होगा जब हम तुम्हें बताएंगे कि एक मर्द को पूरी तरह से थकाना कैसे होता है।" इतना कहते ही उसने राजू के चेहरे पर एक हल्का सा थप्पड़ जैसा स्पर्श किया और उसकी सहेली ने राजू के पैरों को अपने हाथों में जकड़ लिया, जिससे साफ़ था कि वे उसे इतनी आसानी से इस सुख से आजाद नहीं करने वाली थीं।


नेहा ने एक गहरी सांस ली और राजू के शरीर पर अपनी उंगलियों से एक नक्शा बनाने लगी, जिससे राजू के रोंगटे फिर से खड़े होने लगे। उसकी सहेली ने राजू के पैरों को और कसकर जकड़ते हुए उसे अपने ऊपर खींच लिया, जिससे राजू का शरीर अब पूरी तरह से उनकी गिरफ्त में था। उसने राजू की आंखों में देखते हुए धीरे से कहा, "तुमने सोचा था कि एक बार खाली होकर तुम बच निकलोगे? अभी तो हमने तुम्हारी ताकत का एक हिस्सा ही चखा है, हमें तो तुम्हारी पूरी रूह तक को निचड़ना है।" यह कहते ही उसने राजू के लंड को एक बार फिर से अपनी गीली हथेलियों के बीच लिया और उसे इतनी मजबूती से दबाया कि राजू के मुँह से एक अनचाही सिसकी निकल गई। नेहा ने राजू के सीने पर अपनी देह का भार बढ़ाते हुए उसके होंठों को अपने होंठों से ढंक लिया, और इस बार उसका चुंबन पहले से कहीं ज्यादा गहरा और
अधिकारपूर्ण था, जैसे वह राजू के अस्तित्व पर अपना दावा ठोक रही हो। जैसे ही उनके होंठ एक-दूसरे में उलझे, सहेली ने अपनी जांघों के बीच राजू के अंग को एक बार फिर से कसकर दबाया और उसे ऊपर की ओर धकेला, जिससे राजू का शरीर अनचाहे ही एक झटके के साथ ऊपर उठा। अब राजू के अंदर की थकान कहीं गायब हो चुकी थीउसकी थकान अब एक ऐसी भूख में बदल चुकी थी जिसे केवल ये दो स्त्रियाँ ही शांत कर सकती थीं। राजू ने अपनी पकड़ और मजबूत की औरराजू ने अपनी पकड़ और मजबूत की और इस बार उसने पहल करने का फैसला किया। उसने नेहा की कमर को इतनी मजबूती से जकड़ा कि वह उसके शरीर से पूरी तरह चिपक गई, और एक ही झटके में उसने उसे सोफे पर नीचे दबा दिया। उसकी आँखों में अब वह पुराना डर नहीं, बल्कि एक शिकारी जैसी भूख थी। राजू ने नेहा के गले से लेकर उसके स्तनों तक अपनी जीभ का सफर तय करना शुरू किया, जिससे नेहा के मुँह से एक तीखी आह निकली और उसकी उंगलियाँ राजू के बालों में उलझ गईं। तभी उसकी सहेली ने पीछे से राजू के कानों को अपने दाँतों से हल्का सा दबाया और फुसफुसाया, "लगता है हमारा नौकर अब मालिक बनने की कोशिश कर रहा है," लेकिन उसकी आवाज़ में विरोध नहीं, बल्कि एक गहरा उत्साह था। राजू ने बिना समय गंवाए अपनी देह का पूरा भार नेहा पर डाल दिया और एक बार फिर अपनी पूरी ताकत के साथ उसके भीतर समाने की कोशिश की। यह मिलन पहले से कहीं अधिक आक्रामक और तीव्र था; अब यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक जंग बन चुका था जहाँ हर एक धक्का और हर एक कराह यह साबित कर रही थी कि राजू की मर्दानगी उन दोनों की कल्पना से कहीं अधिक शक्तिशाली थी।






